deltin33 Publish time 2026-1-6 23:56:15

गाजियाबाद अथॉरिटी को सुप्रीम कोर्ट से झटका, कंपनी को हफ्ते के भीतर प्लॉट आवंटन करने का निर्देश

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नीलामी में सबसे ऊंची बोली लगाने के बावजूद उसकी बोली रद कर दी थी



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि नीलामी करने वाली अथॉरिटी सिर्फ इसलिए पूरी नीलामी प्रक्रिया को रद नहीं कर सकती कि उसे लगाई गई सबसे ऊंची बोली से अधिक बोली की उम्मीद थी। अदालत ने कहा कि अगर आरक्षित मूल्य से ऊपर वैध बोली लगाई गई है, तो उसे अस्वीकार करने का कोई तर्क या कारण होना चाहिए।

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को रद कर दिया, जिसमें गाजियाबाद में मधुबन बापूधाम योजना के तहत 3150 वर्गमीटर के औद्योगिक प्लाट के लिए गोल्डन फूड प्रोडक्ट्स इंडिया द्वारा लगाई गई बोली को रद करने के फैसले को सही ठहराया गया था। कंपनी ने आरोप लगाया था कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने 2023 में आयोजित नीलामी में सबसे ऊंची बोली लगाने के बावजूद उसकी बोली रद कर दी थी।
4 सप्ताह के भीतर बयाना राशि जमा करने का निर्देश

जीडीए ने दावा किया कि नीलामी प्रक्रिया में उसने पाया कि उसी योजना में इसी तरह की संपत्तियों को कंपनी द्वारा लगाई गई बोली से काफी अधिक कीमतें मिली थीं, इसलिए नीलामी समिति ने नई नीलामी आयोजित करने के लिए अपीलकर्ता की बोली रद करने की सिफारिश की थी। पीठ ने 24 मई, 2024 और 15 जुलाई, 2024 के हाई कोर्ट के आदेशों को रद करते हुए कंपनी को चार सप्ताह के भीतर बयाना राशि फिर से जमा करने का निर्देश दिया।

साथ ही कहा कि बयाना राशि फिर से जमा करने की तिथि से दो सप्ताह के भीतर जीडीए कंपनी के पक्ष में संबंधित प्लाट के आवंटन का आदेश देगा और कंपनी के पक्ष में नीलामी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।शीर्ष अदालत ने कहा, \“\“नीलामी प्रक्रिया की अपनी पवित्रता होती है और केवल वैध कारणों से ही कानून के अनुसार आयोजित नीलामी में सबसे ऊंची बोली को रद किया जा सकता है। यदि आरक्षित मूल्य से ऊपर कोई वैध बोली लगाई गई है, तो उसे स्वीकार नहीं करने का कोई तर्क या कारण होना चाहिए।\“\“
दूसरी पार्टी ने नहीं की थी शिकायत

मामले का जिक्र करते हुए पीठ ने कहा कि किसी अन्य पार्टी ने कंपनी से ज्यादा बोली नहीं लगाई थी और नीलामी के संचालन में कोई खामी नहीं थी। किसी भी दूसरी पार्टी ने जीडीए द्वारा आयोजित नीलामी प्रक्रिया के बारे में कोई शिकायत भी नहीं की थी। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि राज्य की किसी संस्था या एजेंसी द्वारा नीलामी को मनमाने ढंग से रद करने पर कोर्ट की मुहर नहीं लग सकती, जब तक कोई धोखाधड़ी, मिलीभगत, जानकारी छिपाने जैसा कुछ न हो।

अदालत ने कहा, सिर्फ इसलिए कि 123 से 132 वर्गमीटर के छोटे प्लाट 3150 वर्गमीटर के बड़े प्लाट की तुलना में अधिक कीमत पर नीलाम हुए और बेचे गए, यह उस प्लाट की नीलामी रद करने का आधार नहीं हो सकता। छोटे प्लाट की मांग अधिक होने के कारण उन्हें प्रति वर्गमीटर अधिक कीमत पर बेचा गया, जबकि संबंधित प्लाट की कोई मांग नहीं थी क्योंकि नीलामी में सिर्फ दो बोली लगाने वालों ने हिस्सा लिया था।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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