LHC0088 Publish time 2026-1-6 19:26:53

जबलपुर में छह साल से नल उगल रहे संक्रमित गंदा जल, हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर, शीघ्र सुनवाई की मांग

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नलों से आ रही गंदा जल (प्रतीकात्मक चित्र)



डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका के माध्यम से जबलपुर शहर में नलों से घर-घर पहुंच रहे संक्रमित और गंदे पानी की आपूर्ति को कठघरे में खड़ा किया गया है। याचिका में नगर निगम जबलपुर के आयुक्त, महापौर, कलेक्टर, प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को पक्षकार बनाया गया है और मामले की शीघ्र सुनवाई की मांग की गई है।
2019 से उठ रहा मुद्दा, अब तक समाधान नहीं

जनहित याचिकाकर्ता तुलसी नगर निवासी अधिवक्ता ओपी यादव हैं, जिनकी ओर से अधिवक्ता रविंद्र गुप्ता पैरवी कर रहे हैं। याचिकाकर्ता डेमोक्रेटिक लॉयर्स फोरम के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 से ही वे अपने क्षेत्र में नलों से गंदे पानी की आपूर्ति को लेकर लगातार शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।

याचिका में कहा गया है कि चेरीताल और जयप्रकाश नगर जैसे इलाकों के रहवासी सबसे ज्यादा परेशान हैं। कई बार पर्याप्त पेयजल आपूर्ति नहीं होती और जब होती भी है, तो नलों से मटमैला, बदबूदार और नालियों से रिसकर आया संक्रमित पानी निकलता है। मजबूरी में लोग पानी छानकर या उबालकर पी रहे हैं, इसके बावजूद बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
बारिश में और बिगड़ जाते हैं हालात

अधिवक्ता रविंद्र गुप्ता ने बताया कि जनहित याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि बारिश के मौसम में स्थिति और विकराल हो जाती है। जगह-जगह पानी की पाइपलाइन नालियों और नालों से होकर गुजरती हैं, जहां लीकेज की समस्या बनी हुई है। बार-बार शिकायतों के बावजूद इन लीकेज को ठीक नहीं किया जा रहा।

याचिका के साथ 2019 से 2026 तक के प्रिंट मीडिया में प्रकाशित समाचारों की कतरनें भी संलग्न की गई हैं, जिनमें गंदे पानी की समस्या को उजागर किया गया है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि जब मीडिया लगातार चेतावनी दे रहा है, तो स्थानीय स्वशासन संस्था नगर निगम अब तक नींद से क्यों नहीं जागी। बीते छह वर्षों में पेट संबंधी संक्रमण के कई मामले सामने आए हैं और हाल ही में गांव निगड़ी में करीब 60 लोग बीमार पड़े थे।

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फिल्टर प्लांट बंद, गुणवत्ता जांच की व्यवस्था नहीं

जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई फिल्टर प्लांट बंद पड़े हैं और पानी की गुणवत्ता जांचने का कोई ठोस व नियमित मापदंड नहीं है। गंदे पानी से होने वाले संक्रमण के कारण अस्पताल मरीजों से भरे पड़े हैं, लेकिन जिम्मेदारों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
अनुच्छेद 21 के तहत हस्तक्षेप की मांग

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही आग्रह किया गया है कि हाईकोर्ट पूरे मामले में एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन करे और अपनी निगरानी में समस्या के स्थायी समाधान के निर्देश दे।

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शिकायत निवारण की कोई व्यवस्था नहीं

याचिका में यह भी कहा गया है कि जबलपुर में 79 वार्ड होने के बावजूद गंदे पानी की शिकायत दर्ज कराने के लिए न तो कोई हेल्पलाइन है, न पोर्टल और न ही 24 घंटे में समस्या के निराकरण की कोई प्रभावी व्यवस्था। करोड़ों रुपये के बजट के बावजूद यह स्पष्ट नहीं है कि राशि कहां खर्च हो रही है।
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