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उम्मीद 2026 : चिप्सोना आलू से स्वावलंबन की पटकथा लिख रही महिलाएं

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चिप्स तैयार करती महिलाएं। वहीं, महिलाओं की ओर से वृहद स्तर पर किया जा रहा चिप्सोना आलू का उत्पादन। जागरण



शैलेंद्र गोदियाल, जागरण हरिद्वार: आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा ग्रामीण महिलाओं के हाथों आकार लेने लगी है। इसकी झलक जिला मुख्यालय हरिद्वार से 28 किमी दूर भगवानपुर ब्लाक के नौकराग्रांट (बुग्गावाला) में देखी जा सकती है।

यहां प्रकाशमय बहुद्देश्यीय स्वायत्त सहकारिता से जुड़ी 25 महिलाएं चिप्सोना आलू उत्पादन से लेकर चिप्स, नमकीन व पापड़ तैयार कर आर्थिक स्वावलंबन की पटकथा लिख रही हैं। इन महिलाओं ने अपने उत्पादों को आफलाइन के साथ आनलाइन प्लेटफार्म पर भी बाजार में उतारा है।

नौकराग्रांट में इस उद्यम की शुरुआत वर्ष 2023 में तब हुई, जब ग्रामोत्थान परियोजना ने नौकराग्रांट गांव में प्रकाशमय कलस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) का गठन करवाकर उसे सहकारिता से जोड़ा।

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ग्रामोत्थान परियोजना ने प्रयोगात्मक रूप से महिलाओं को आलू का बीज उपलब्ध करवाए। अच्छा उत्पादन हुआ तो महिलाओं को इसी क्षेत्र में आर्थिकी को आगे बढ़ाने की राह मिली। यहीं से स्वरोजगार आधारित इस उद्यम की नींव पड़ी।

महिलाओं ने बैठक कर व्यवसाय को बढ़ाने की योजना तैयार की। वर्ष 2024-25 में महिलाओं ने ‘चिप्सोना’ आलू का 65 क्विंटल बीज खरीदा। इससे 35 टन से अधिक उत्पादन हुआ, जो अपेक्षा से कहीं अधिक था। चिप्सोना आलू को ज्वालापुर और देहरादून मंडी में भेजा गया, जहां इन्हें 25 से 30 रुपये प्रति किलो दाम मिले।

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फिर महिलाओं ने तय किया कि क्षेत्र में आलू उत्पादन की प्रचुर संभावनाओं को देखते हुए आलू उत्पादन के साथ प्रसंस्करण इकाई स्थापित की जाए। इसके लिए आलू चिप्स यूनिट की मशीन व अन्य सामग्री खरीदी गई। उत्पादन, गुणवत्ता और विपणन की व्यावहारिक समझ के लिए ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान ने महिलाओं को 17 दिन का प्रशिक्षण दिया।

शुरुआती दौर में बाजार, मजदूरी और बिक्री को लेकर आशंकाएं थीं, लेकिन सामूहिक निर्णय से तय हुआ कि पहले चरण में महिलाएं श्रमदान का कार्य करेंगी। जैसे-जैसे उत्पादन व बिक्री बढ़ेगी, उन्हें मानदेय दिया जाएगा।

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पहले महीने 5,000 रुपये की बिक्री हुई और जिला व ब्लाक कार्यालयों से भी आर्डर मिलने लगे। साथ ही चिप्स की गुणवत्ता को लेकर भी सराहना मिली। अब महिलाएं सप्ताह में 75 किलो आलू के चिप्स व नमकीन तैयार कर रही हैं और पांच माह में ही इस उद्यम ने गति पकड़ ली है।
उत्पाद को दिया ‘ग्रामीण बाइट’ ब्रांड नाम

महिलाओं ने अपने उपक्रम के जीएसटी पंजीकरण, उद्योग पंजीकरण और फूड लाइसेंस की औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। चिप्स, नमकीन व पापड़ के उत्पाद को ‘ग्रामीण बाइट’ ब्रांड नाम दिया गया है। इसी ब्रांड से उत्पादों को आनलाइन प्लेटफार्म अमेजन से जोड़ा गया है।
इन महिलाओं ने किया सामूहिक प्रयास

सीएलएफ अध्यक्ष रेनू चौहान, सचिव मंजू चौहान, कोषाध्यक्ष अर्चना, सदस्य निर्मला, अनीता, सविता, शहनाज, रीना, रीता, परमजीत व मोनिका।

प्रकाशमय बहुद्देश्यीय स्वायत्त सहकारिता की ओर से संचालित आलू चिप्स यूनिट महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण स्वरोजगार का बेहतरीन उदाहरण है। ग्रामोत्थान परियोजना के माध्यम से महिलाओं को उत्पादन से लेकर विपणन तक के कार्य से जोड़ा गया है।
- ललित नारायण मिश्रा, मुख्य विकास अधिकारी, हरिद्वार

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