हिमाचल में सराहन, लंज व बद्दी में शहर बसाने के लिए भूमि अधिग्रहण शुरू, चंडीगढ़ के नजदीक नई सिटी बनाने का क्या है उद्देश्य?
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/06/article/image/Baddi-industrial-Area-1767687238549.jpgबद्दी और चंडीगढ़ के नजदीक हिमाचल सरकार नया शहर बसाएगी।
जागरण संवाददाता, बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से कांगड़ा स्थित लंज, सिरमौर स्थित सराहन और बद्दी में हिमुडा के माध्यम से शहर बसाने के लिए 10-10 हजार बीघा भूमि के चयन और अधिग्रहण की प्रारंभिक स्तर पर प्रक्रिया शुरू हो गई है। तीनों जिलों में उपायुक्तों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
आवास एवं शहरी विकास मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया कि नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेताओं द्वारा जनता को गुमराह करने के उद्देश्य से दुष्प्रचार किया जा रहा है, जबकि हकीकत यह है कि अभी तक न तो किसी जमीन का हस्तांतरण हुआ है और न ही किसी निजी बिल्डर को हिमुडा की जमीन देने का कोई निर्णय लिया है।
इसलिए बसाया जा रहा चंडीगढ़ के नजदीक शहर
प्रदेश सरकार ने केवल एक नीतिगत निर्णय लिया है कि चंडीगढ़ की परिधि में जहां हरियाणा और पंजाब की सीमाएं लगती हैं, वहां एक सुव्यवस्थित नया शहर बसाने की संभावना पर विचार किया जाए। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि चंडीगढ़ और उसके आसपास बसे न्यू चंडीगढ़, मोहाली, खरड़, जीरकपुर और पंचकूला जैसे क्षेत्रों में हिमाचल प्रदेश के लगभग 15 हजार परिवारों द्वारा भारी धनराशि खर्च कर बसने की मजबूरी को रोका जा सके और प्रदेश के लोगों को अपने ही राज्य में बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
75 हजार लोगों से आवेदन शुल्क लिया पर हुआ कुछ नहीं
उन्होंने याद दिलाया कि भाजपा शासनकाल में ही हिमुडा के तहत कालोनियां विकसित करने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे, जिनके लिए लगभग 75 हजार लोगों से आवेदन शुल्क लिया गया, लेकिन आज तक उन योजनाओं पर कोई ठोस कार्य नहीं हुआ।
बद्दी नालागढ़ में जमीन देने पर उठाए सवाल
मंत्री ने भाजपा नेताओं से सवाल किया कि बद्दी-नालागढ़ क्षेत्र में पूर्व भाजपा सरकार ने किस नियम के तहत जमीनें मात्र 750 रुपये प्रति बीघा के हिसाब से जमीन दीं। इसके विपरीत वर्तमान सरकार पारदर्शी नीति के तहत काम कर रही है, जिसमें आवंटन पूरी तरह नियमों के अनुसार होगा। टाइप-1, टाइप-2, टाइप-3 आवासों के साथ-साथ स्वतंत्र प्लाट भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि समाज के हर वर्ग की आवासीय जरूरतें पूरी हो सकें।
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