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पति के अवैध संबंध को आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं माना जा सकता : हाई कोर्ट

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तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पति के अवैध संबंधों से परेशान होकर पत्नी द्वारा आत्महत्या करने के मामले में हाई कोर्ट ने पीड़ित पक्ष की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि अवैध संबंध नैतिक रूप से गलत हो सकते हैं, लेकिन जब तक आत्महत्या के लिए सीधा और स्पष्ट संबंध साबित न हो, तब तक धारा 306 के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ की गई अपील हाई कोर्ट में खारिज कर दी गई।

जानकारी के अनुसार कुंती की शादी 2011 में रवि कुमार गायकवाड से हुई थी। कुंती के स्वजन ने संतान नहीं होने, कम दहेज और अशिक्षित होने को लेकर पति पर प्रताड़ना के आरोप लगाए। पति के कथित तौर पर एक महिला मित्र से अवैध संबंध होने की बात भी कही गई।
2017 में कर ली आत्महत्या

चार जून 2017 को कुंती ने आत्महत्या कर ली। इसके बाद पति और उसकी महिला मित्र के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया, लेकिन अभियोजन पक्ष प्रताड़ना या उकसावे का कोई प्रमाण पेश नहीं कर सका।

22 जुलाई 2022 को महासमुंद सत्र न्यायालय ने पति और उसकी महिला मित्र को दोषमुक्त कर दिया। दोषमुक्ति के खिलाफ पीड़ित पक्ष ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय श्याम अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई।
कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल पति के अवैध संबंध को आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर मृतका के पति और उसकी महिला मित्र को धारा 306 से दोषमुक्त किया गया।

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