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Aaj ka Panchang 6 January 2026: सकट चौथ के दिन बन रहे मंगलकारी योग, यहां पढ़ें चंद्रोदय का समय और शुभ मुहूर्त

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Aaj ka Panchang 6 January 2026: सकट चौथ के शुभ-अशुभ योग



आनंद सागर पाठक, एस्ट्रोपत्री। पंचांग के अनुसार, आज यानी 6 जनवरी को माघ महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। इस तिथि का समापन प्रातः 08 बजकर 01 मिनट पर होगा। इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू होगी। इस तिथि पर सकट चौथ का व्रत किया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से संतान को लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिन चंद्र दर्शन करने का विशेष महत्व है। सकट चौथ के दिन कई योग भी बन रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग (Aaj ka Panchang 6 January 2026) के बारे में।

तिथि: कृष्ण तृतीया
मास पूर्णिमांत: माघ
दिन: मंगलवार
संवत्: 2082

तिथि: कृष्ण तृतीया – प्रातः 08 बजकर 01 मिनट तक
तिथि: कृष्ण चतुर्थी – 7 जनवरी को प्रातः 06 बजकर 52 मिनट तक
योग: प्रीति – रात्रि 08 बजकर 21 मिनट तक
करण: विष्टि – प्रातः 08 बजकर 01 मिनट तक
करण: बव – सायं 07 बजकर 21 मिनट तक
करण: बालव – 7 जनवरी को प्रातः 06 बजकर 52 मिनट तक

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
सूर्योदय का समय: प्रातः 07 बजकर 15 मिनट पर
सूर्यास्त का समय: सायं 05 बजकर 39 मिनट पर
चंद्रोदय का समय: सायं 08 बजकर 54 मिनट पर
चंद्रास्त का समय: प्रातः 09 बजकर 35 मिनट पर
आज के शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 06 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक
अमृत काल: प्रातः 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 17 मिनट तक
आज के अशुभ समय

राहुकाल: दोपहर 03 बजकर 03 बजे से सायं 04 बजकर 21 मिनट तक
गुलिकाल: दोपहर 12 बजकर 27 बजे से दोपहर 01 बजकर 45 मिनट तक
यमगण्ड: प्रातः 09 बजकर 51 बजे से प्रातः 11 बजकर 09 मिनट तक

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(Image Source: AI-Generated)
आज का नक्षत्र

आज चंद्रदेव आश्लेषा नक्षत्र में रहेंगे।
आश्लेषा नक्षत्र: दोपहर 12 बजकर 17 मिनट तक
सामान्य विशेषताएं: मजबूत, हंसमुख, उत्साही, चालाक, कूटनीतिक, स्वार्थी, गुप्त स्वभाव वाले, बुद्धिमान, रहस्यवादी, तंत्र-मंत्र में रुचि रखने वाले, तीव्र स्मृति वाले, नेतृत्वक्षम और यात्रा प्रिय।
नक्षत्र स्वामी: बुध देव
राशि स्वामी: चंद्र देव
देवता: नाग
प्रतीक: सर्प
सकट चौथ का महत्व

सकट चौथ हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसे विशेष रूप से माताएं अपनी संतान की सुख-समृद्धि और दीर्घायु के लिए रखती हैं। यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इसे तिलकुटा चौथ या संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है।
इस दिन भगवान गणेश और माता सकट की पूजा का विशेष महत्व है। व्रती महिलाएं पूरे दिन उपवास रखती हैं और रात्रि में चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत खोलती हैं। पूजा में तिल, गुड, लड्डू और मोदक का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि सकट चौथ का व्रत करने से संतान से जुड़े कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
सकट चौथ पूजा विधि

[*]सकट चौथ के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, घर की सफाई कर पूजा स्थान को शुद्ध करें।
[*]दिनभर उपवास रखें और मन में संतान की सुख-समृद्धि का संकल्प लें।
[*]शाम के समय चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। उस पर भगवान गणेश और माता सकट की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
[*]भगवान गणेश की पूजा में तिल, गुड, मोदक, लड्डू, फूल, दूर्वा, रोली, चावल और दीपक रखें।
[*]सबसे पहले दीपक जलाएं और गणेश जी का ध्यान करें। फिर रोली-चावल से तिलक करें और फूल व दूर्वा अर्पित करें। तिल और गुड से बने भोग का प्रसाद चढ़ाएं।
[*]इसके बाद सकट चौथ की कथा सुनें या पढ़ें। रात्रि में चंद्रमा उदय होने पर जल, फूल और अक्षत से चंद्रदेव को अर्घ्य दें।
[*]चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोलें और प्रसाद ग्रहण करें। मान्यता है कि विधि-विधान से सकट चौथ की पूजा करने से संतान संबंधी कष्ट दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।


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