राजेंद्र नगर जैन मंदिर विवाद मामले में कोर्ट ने खारिज की याचिका, कहा- जानबूझकर गलत फोरम में दायर की गई पिटीशन
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/06/article/image/court-News-(1)-1767645797449.jpgजागरण संवाददाता, नई दिल्ली। तीस हजारी स्थित जिला न्यायाधीश की अदालत ने राजेंद्र नगर स्थित श्री जैन मंदिर और उसके प्रबंधन को लेकर चल रहे विवाद को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी। जिला न्यायाधीश चंदर मोहन ने राजेंद्र नगर जैन एसोसिएशन की ओर से दायर सिविल वाद को खारिज याचिका करते हुए कहा कि वादी संस्था ने मुकदमे का मूल्यांकन बिना किसी ठोस आधार के किया है और जानबूझकर गलत फोरम में याचिका दायर की गई।
याचिका में मुकदमे की कीमत 3.10 लाख दर्शाकर जिला न्यायाधीश की अदालत में मामला दाखिल किया गया, जबकि राहतें मुख्य रूप से निषेधाज्ञा से जुड़ी थीं, जिन्हें सिविल न्यायाधीश की अदालत में दायर किया जाना चाहिए था। अदालत ने यह भी नोट किया कि जिस भूमि पर आश्रम और मंदिर स्थित हैं, वह भूमि मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय द्वारा विश्व अहिंसा संघ को लीज पर दी गई है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वादी खुद को केवल सेवादार बता रहा है और उसने यह स्पष्ट नहीं किया कि उसे मंदिर के प्रबंधन या आश्रम में प्रवेश का स्थायी अधिकार कब और किस आधार पर मिला। ऐसे में केवल निषेधाज्ञा का मुकदमा दायर करना पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि जब अधिकार और स्थिति स्पष्ट न हों, तब केवल निषेधाज्ञा के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।
मामले में राजेंद्र नगर जैन एसोसिएशन ने आरोप लगाया था कि विश्व अहिंसा संघ, उससे जुड़े ट्रस्ट और उनके पदाधिकारियों ने अहिंसा भवन, शंकर रोड स्थित श्री जैन मंदिर के प्रबंधन में अवैध हस्तक्षेप किया। आरोपों के अनुसार मंदिर का नाम बदलने की कोशिश की गई, मंदिर के ताले बदले गए, सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए और सेवादार से चाबियां छीन ली गईं।
इसके अलावा एसोसिएशन के पदाधिकारियों को पर्सन नान ग्राटा (अवांछित व्यक्ति) घोषित कर मंदिर में प्रवेश से रोका गया।
वादी का कहना था कि वर्ष 1989 से वह मंदिर की सेवा और प्रबंधन कर रहा है और मंदिर का निर्माण जैन समाज के दान से हुआ है।
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